1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी की हार का किसी को पूर्वानुमान नहीं था

1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी की हार का किसी को पूर्वानुमान नहीं था

1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी को 295 और कांग्रेस को 154 सीटें मिली और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने | सरकार ठीक-ठाक चल रही थी पर जनता पार्टी के कुछ बड़े नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण मोरारजी की सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी

1977 के जिन लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी की पराजय हो गई थी उसके बारे में पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि पता नहीं कैसे नतीजे आएंगे | क्योंकि इमरजेंसी की ज्यादतियों की पृष्ठभूमि में चुनाव होने को थे | आज जब कुछ लोग सन 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर स्पष्ट भविष्यवाणियों कर रहे हैं तो उस पर आचरण होता है क्या इतना आसान है की सटीक चुनावी भविष्यवाणी करना?

जनवरी 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चुनाव की घोषणा कर दी थी उन्होंने कहा कि मार्च में चुनाव होंगे क्योंकि उन्होंने एमरजैंसी को पूरी तरह समाप्त किए बिना ऐसा किया था इसीलिए पतिपक्षी दल थोड़ी देर के लिए हतप्रभ हो गए थे | चुनाव की घोषणा के बाद जयप्रकाश नारायण ने प्रति पक्षी दलों से अपील की थी कि वे आपस में विलय कर ले| एक दल बना ले जब इस काम को देरी होने लगी तो जेपी ने धमकी दी कि यदि आप लोग मिले नहीं करेंगे तो हम नई पार्टी बना लेंगे फिर तो वह लाइन पर आ गए |

4 गैर कांग्रेसी दलों यथा जनसंघ संगठन ,कांग्रेश सोशलिस्ट पार्टी और भारतीय लोक दल के नेताओं ने मिलकर जनता पार्टी बना ली | बड़ौदा डायनामाइट षड्यंत्र मुकदमे के सिलसिले में देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद जार्ज फर्नांडिस नेता चुनाव के बहिष्कार के पक्ष में ही एक बार अपनी राय दे दी थी | हालांकि जनता पार्टी कौन कहे सोशल इस घटना के सभी अन्य नेता जार्ज फर्नांडिस से असहमत थे

बाद में जनता पार्टी ने जार्ज फर्नांडिस को बिहार के मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया और वह भारी मतों से जीते चुनाव की घोषणा के बाद प्रेस सेंसरशिप में ढलाई जरूर दे दी गई थी| राजनीतिक बंदियों की रिहाई शुरू हो गई थी | पर रिहाई की रफ्तार काफी धीमी थी | याद रहे कि 25 जून 1975 की रात में जब आपातकाल की घोषणा हुई तो उनके साथ देशभर के करीब सवा लाख राजनीतिक कार्यकर्ताओं नेताओं तथा कुछ अन्य लोगों को किसी सुनवाई के बिना जेल में ठूंस दिया गया था कुछ पत्रकार भी बंदी बना लिए गए थे |

लोगों के मौलिक अधिकार कौन कहे जीने का अधिकार भी छीन लिया गया था यानी प्रति पक्षी दलों के पास चुनावी तैयारी के लिए समय बहुत कम था पर जब चुनाव प्रचार शुरू हुआ तो जनता पार्टी के पक्ष में भारी जन समर्थन की खबरें सुदूर जगहो से भी आने लगी | उससे पहले चुनाव की घोषणा के तत्काल बाद जयप्रकाश नारायण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि सरकार सोचती है कि उसे चुनाव में बहुमत मिलेगी क्योंकि विरोधी दल को चुनाव की तैयारी करने के लिए कोई समय ही नहीं मिलेगा | सत्तारूढ़ दल ने आपात स्थिति को पूर्ण रूप से समाप्त ना करने और हजारों बंदियों को ना छोड़ने से अपना इरादा स्पष्ट कर दिया है इसलिए यदि कांग्रेस जीत जाती है तो आगे क्या होगा यह बात भी लोगों के सामने स्पष्ट हो जानी चाहिए |

मीडिया से बातचीत में तब के आंदोलन के शीर्ष नेता जेपी ने हालांकि यह भी कहा कि लोगों को इतनी आसानी से धोखा नहीं दिया जा सकता है उन्होंने कठिन रास्ते में यह सीख लिया है कि केवल प्रजातांत्रिक तरीके से ही गरीबों के अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं अधिकारियों के दुरुपयोग से लोगों के मन में विरोध की भावना पैदा हो गई थी|
इसी कारण उसकी सहानुभूति विरोधी दल के साथ है

जेपी का यह अनुमान बाद में यही सही साबित हुआ था यानि 1977 के चुनाव नतीजे ने इसे सही साबित कर दिया था कि हालांकि उत्तर भारत की उपेक्षा दक्षिण भारत में जनता पार्टी को बहुत कम सीटें मिली उधर चुनाव की घोषणा कर देने के तुरंत बाद इंदिरा गांधी ने रिक्त स्थानों को देखते हुए कांग्रेस संसदीय बोर्ड को पूर्ण गठित किया राज्यों को निर्देश दिया कि वह उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश भेजें

नवगठित जनता पार्टी के अध्यक्ष मोरारजी देसाई और उपाध्यक्ष चरण सिंह चुने गए युवा तुर्क चंद्रशेखर का गुट जनता पार्टी में शामिल हो गया था | 25 जून 1975 में अपनी गिरफ्तारी तक चंद्रशेखर कांग्रेस में थे मोरारजी देसाई ने घोषणा की थी कि जनता पार्टी अच्छे उम्मीदवार खड़ा करेगा उनका भरसक पालन हुआ | जेपी ने लोगों से अपील की थी कि वह जनता पार्टी को उदारतापूर्वक दान दें ताकि चुनाव का खर्च उठाया जा सके |

इमरजेंसी से उभरे अधिकतम मतदाताओं मैं जनता पार्टी के पक्ष में इतना अधिक उत्साह था कि जनता पार्टी का अधिकतर चुनाव खर्च आम जनता ने ही उठा लिया था उस चुनाव में मुख्य रूप से कांग्रेस के साथ CPI थी तो जनता पार्टी के साथ CPM और अकाली दल | जगजीवन राम के नेतृत्व वाली कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी ने जनता पार्टी के साथ चुनावी तालमेल किया जगजीवन राम ने चुनाव की घोषणा के बाद कांग्रेसी छोड़ दी

याद है कि 1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी को 295 सीट हासिल हुई और कांग्रेस को 154 सीटें मिली — मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने सरकार ठीक-ठाक चल रही थी जनता पार्टी के कुछ बड़े नेताओं की राजनीतिक मंशा के कारण मोरारजी देसाई सरकार का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी | सन 1980 में आम चुनाव हुआ और इंदिरा गांधी एक बार फिर सत्ता में आ गई |

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